क्यों हैं Generation Y इतनी नाखुश
The Wisdom Project - Hindi
इनसे मिलिए , ये है लूसी

लूसी, नई जनरेशन - जनरेशन Y का हिस्सा है। जनरेशन Y वो जनरेशन है जो 1975 से 1990 के बीच पैदा हुई है। जनरेशन Y के कई सदस्य अपने आप को एक महान गाथा का हीरो मानते है। उनकी इसी धारणा के फायदे और नुकसान थोड़ी देर में जानेंगे। (इस जनरेशन के लोगों को हम आगे GYPSY कहकर बुलाएंगे)
जनरेशन Y के कई सदस्यों की तरह लूसी को भी खुद पर बड़ा नाज़ है। बस एक प्रॉब्लम है - वो थोड़ी नाखुश है। इस जनरेशन की नाखुशी के बारे में जानने से पहले ये जानते है क कोई भी कभी भी नाखुश कब होता है?
इसका एक सीधा सा फार्मूला है-

ख़ुशी = वास्तविकता - उम्मीद
अर्थात
यदि वास्तविकता = उम्मीद तो ना ख़ुशी, ना ही गम।
यदि वास्तविकता > उम्मीद तो ख़ुशी ज्यादा , दुःख कम ।
यदि वास्तविकता < उम्मीद तो दुःख ज्यादा , ख़ुशी कम।
सीधी सी बात है - अगर आपके जीवन की वास्तविकता आपकी उम्मीदों से बढ़कर है तो आप खुश होंगे , अन्यथा नाखुश होंगे।
लूसी की स्थिति समझने के लिए अब हम उनके माता पिता से मिलते है।

लूसी के माता पिता 60 और 70 के दशक में पैदा हुए। (उनकी जनरेशन को बेबी बूमर्स भी कहा जाता है)
लूसी के दादा दादी और नाना नानी आज़ादी के समय पैदा हुए।
अगर लूसी के माँ बाप ने 60 के दशक की गरीबी देखी थी तो उनके माँ बाप से 40 के दशक का बटवारा और महंगाई देखी थी।
इन सभी के लिए आज की पीढ़ी का जीवन फूलों की सेज पर सोने जैसा आसान और सहज है।

दादा दादी और नाना नानी की इस पीढ़ी ने बहुत गरीबी देखी थी और एक गरीब और पीड़ित देश को बनते-बिगड़ते देखा था। उन्हें अपने जीवन में आर्थिक सुरक्षा पाने का जूनून था।
उन्होंने अपने बच्चो को (लूसी के माँ बाप ) को सुरक्षित और व्यावहारिक करियर बनाना सिखाया।
उन्होंने सिखाया के ऐसा करियर चुनो जिससे तुम्हारी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके।
बड़े होकर लूसी के माँ बाप ने स्थिर और समृद्ध करियर की तलाश की जो की कुछ ऐसा दिखता हो

उन्हें सिखाया गया था के अगर वो सालों साल, जीवन भर, कड़ी मेहनत करें तो उन्हें इस साफ़ हरी घास से भरे लॉन जैसे करियर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
मेहनत करने पर उनका करियर ग्राफ कुछ ऐसा होगा-

9० के दशक में लूसी के माता पिता अपने करियर के मध्य में थे। इस समय देश और दुनिया में अभूतपूर्व आर्थिक विकास हो रहा था। उन्होंने अपनी उम्मीदों से कई ज्यादा विकास किया और समृद्धि पायी। इससे वे बेहद खुश और आकांक्षावादी बने।
उनका करियर कुछ ऐसा रहा - उम्मीदों से बढ़कर

लूसी के माता पिता का जीवन उम्मीदों से ज्यादा आसान और भाग्यशाली रहा। इस वजह से उन्होंने लूसी को भी असीमित संभावनाओं की आकांक्षा के साथ पाला।
और ऐसा करने वाले वो अकेले नहीं थे।
उनकी पूरी जनरेशन ने अपने बच्चों से कहा कि वो जीवन में जो चाहे वो बन सकते है। वो दुनिया बदल सकते है - बस चाहने भर की देर है।
इससे लूसी की जनरेशन के बच्चो को लगने लगा कि वो हीरो है।
इससे सारे GYPSY अपने करियर को लेकर बड़े महत्वकांक्षी होने लगे। उन्हें अपना माँ बाप के सपनो का हरा भरा लॉन छोटा और कम लगने लगा। उन्हें अब हीरो जैसे सपने देखने थे। उनके लॉन में सिर्फ हरी घास नहीं होगी, फूल भी होंगे।

अब GYPSY जनरेशन के बारे में कुछ बातें जानते है -
पहली- जिप्सी बेहद महत्वाकांक्षी होते हैं।

“बनने को तो मैं देश का राष्ट्रपति भी बन सकता हूँ। पर क्या मैं सच में देश का राष्ट्रपति बनना चाहता हूँ? क्या मुझे पॉलिटिक्स में जाना भी है?
नहीं, शायद नहीं। पॉलिटिक्स में जाना मेरी संभावनाओं के साथ समझौता होगा”
एक GYPSYको अपने करियर से कई ज्यादा उम्मीदें होती है। उसके माँ बाप का समृद्धि और सुरक्षा दर्शाता हुआ साधारण सा हरा लॉन उसके लिए बेहद मामूली है।
उसे चाहिए के उसका करियर उसकी ही तरह बेहद अनोखा और ख़ास हो।
इसका एक बढ़िया उदहरण 3 idiots मूवी में देखने को मिला था। उस मूवी के हीरो - रणछोड़दास चांचड़ ने कहा था कि अपने पैशन के पीछे भागो , कामयाबी अपने आप पीछे आएगी।
ये पैशन के पीछे भागने का चलन पिछले 10-15 सालों में ही आया है।
इस चलन के चलते एक सुरक्षित करियर को अब अक्सर कमतर माना जाने लगा है।
इसका प्रमाण गूगल ट्रेंड्स के ये आंकड़े है जिनमें ये साफ़ पता चलता है कि हमारी प्राथमिकताएं किस तरह बदल रही है।


लूसी की जनरेशन को अपने माता पिता के करियर समृद्धि तो अवश्य चाहिए, साथ ही उन्हें चाहिए के उनका करियर उन्हें आत्म संतुष्टि भी दे जिसके बारे में उनके माता पिता ने कभी विचार भी नहीं किया था।
इसके अलावा, लूसी की जनरेशन की एक और समस्या है - उन्हें अपने करियर से मानसिक और आर्थिक संतुष्टि की अपेक्षा तो है ही,साथ ही वो ये भी चाहते है कि उनका करियर ख़ास हो, विशेष हो - क्यूंकि उन्हें बचपन से यह कहा गया है कि - वो ख़ास है।

इसी के साथ इस जनरेशन के बारे में एक और बात जानते है -
GYPSY काफी भ्रांतियों के शिकार है
लूसी को लगता है कि उनकी जनरेशन के तो सभी लोगों का करियर परिपूर्ण होगा, पर उसका स्वयं का करियर भीड़ से अलग होगा, हटकर होगा, क्यूंकि वो स्वयं सबसे अलग है ,उम्दा है ।
तो जहां एक पूरी जनरेशन फूल से भरे हरे लॉन के सपने देख रही है,वहां उस जनरेशन का हर व्यक्ति अपने खुद के लिए उससे भी अधिक बेहतरीन करियर के सपने देख रहा है।

अगर हर कोई ये सोचने लगे कि वो स्पेशल है तो कोई भी स्पेशल नहीं रह जाता।
स्पेशल की परिभाषा ही कुछ ऐसी है
spe-cial| ‘speSHel |
adjective
better, greater, or otherwise different from what is usual.
इस वक़्त जो जनरेशन Y के लोग इसको पढ़ रहे होंगे उन्हें लगेगा कि “बात तो सही है ,पर ये मुझपे लागू नहीं होती है क्यूंकि मैं तो ख़ास हूँ , अलग हूँ ।“
और ये ही उनकी सबसे बड़ी समस्या है।
धीरे धीरे ये भ्रान्ति उनके दुःख का कारण बनने लग जाती है।
जब ये अपने करियर की शुरुआत करते है तो इन्हे लगता है कि अब तो बस कामयाबी उनके कदम चूमेगी।
उन्हें बस एक सही करियर का चयन करना है।
जहाँ एक और लूसी के माँ बाप ने वर्षों के कठिन संघर्ष के बाद किसी सफलता की उम्मीद की थी, लूसी अपने करियर के पहले दिन से वो उम्मीद पाले बैठी है।
लूसी की अपने करियर से उम्मीद कुछ इस तरह दिखती है

यह जनरेशन सामान्यतः इस वास्तविकता से परे रहती है कि करियर बनाना एक मुश्किल और लम्बा काम है । इसके लिए सालों की कड़ी मेहनत और तत्परता चाहिए होती है ।
और आपको अपनी मेहनत के परिणाम तुरंत मिल जाये ये भी ज़रूरी नहीं है।
बड़े से बड़ा आदमी भी 20-30 वर्ष की आयु में कुछ बहुत ख़ास नहीं कर पाया होता है।
हाँ, पर इसका यह मतलब नहीं है कि वो उस वक़्त अपने लक्ष्य को लेकर कुछ भी नहीं कर रहे होते है।
इस जनरेशन के लिए ये बात समझना बहुत मुश्किल है।
पर ऐसा क्यों है?
अमरीकी प्रोफेसर , पॉल हार्वे, इसी विषय पर शोध करते है। वो यह बताते है कि, अति आशावादी और लगभग असंभव उम्मीदों के कारण, इस जनरेशन के लिए अपने बारे में कुछ भी नकारात्मक सुनना बेहद मुश्किल हो जाता है।
वो कभी अपनी कमियों को स्वीकार नहीं कर पाते। यही सोच उनके लिए बेहद निराशा का कारण बन जाती है।
वे अक्सर अपने आप को ऐसे उच्च शिखर का पात्र मानते है जिसके वे बिल्कुल योग्य नहीं है।
जब असल जीवन में उनकी उम्मीदें टूटती है तब उन्हें तनाव होता है, निराशा होती है।
पॉल हार्वे कहते है कि जो लोग इस आयु वर्ग के लोगों को अपने यहाँ काम पे रखना चाहते है उन्हें उनसे इंटरव्यू में ये सवाल अवश्य पूछना चाहिए -
"क्या आप अपने आप को अपने साथियों से बेहतर मानते है ? अगर हाँ , तो कारण बताएं "
अगर यह व्यक्ति पहले सवाल का जवाब “हाँ” दे पर कारण अच्छे से न बता पाए, तो समझ जाना चाहिए कि इसे बचपन से स्वयं को श्रेष्ठ बताया गया है। परन्तु यह श्रेष्ठता इसे अभी तक इसे हासिल नहीं हुई है।
वास्तविकता में इन भ्रांतियों का कोई लाभ नहीं है। कॉलेज से निकलने के कुछ साल बाद लूसी स्वयं को यहां पाती है।

जितनी ज्यादा उम्मीदें उतनी ही ज्यादा निराशा।
इसके अतिरिक्त एक और बात है जिससे ये जनरेशन अधिक नाखुश रहती है -
और वो है अपने आस पास वालों का उपहास ।
लूसी के माता पिता के कई साथी भी उनसे कई अधिक सफल रहे होंगे पर उन्हें अपने साथियों के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं रही होगी ।
कभी किसी ने कोई खबर दे दी तो पता चल गया।
इसके विपरीत लूसी को फेसबुक के ज़रिये अपने सभी साथियों के दिन रात की हर गतिविधि के बारे में हमेशा लेटेस्ट अपडेट मिलती रहती है।
सोशल मीडिया ने लूसी के लिए एक ऐसी दुनिया बना दी है जिसमें उसे -
1. अपने लगभग हर साथी की हर गतिविधि काफी खुले तौर पर उपलब्ध होती है ।
2. सोशल मीडिया पे सभी लोग अपनी असल वास्तिविकता का एक लीपा पता रूप प्रस्तुत करते है ।
3. इससे हर व्यक्ति को सामने वाले का जीवन ख़ुशीयों से भरा , और किसी भी तरह के दुःख से परे लगता है ।
लूसी, जो पहले से ही अपनी उम्मीदों के पूरा न होने के कारण दुखी थी, अब और अधिक दुखी हो जाती है जब वो इस दुःख में अपने आप को अकेला पाती है ।
उसे जो दुनिया दिख रही है उसमे उसके अलावा कर कोई बेहद खुश है।

तो अपने करियर की सही शुरुआत के बावजूद लूसी अपने आप को दुखी और असंतुष्ट पाती है।
लूसी और उसकी जनरेशन के सभी लोगों को मैं ये 3 सलाह देना चाहता हूँ-
1. महत्वकांक्षी रहो - आपके सामने अपार संभावनाएं है। हो सकता है तुम्हे आज वो संभावनाएं दिखाई ना दे, पर अगर लगकर मेहनत करोगे तो बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हो
2. तुम ख़ास नहीं हो - सच्चाई यह है की आज तुम एक अनुभवहीन युवा हो जिसके पास दुनिया को देने के लिए ऊपरी ज्ञान के अलावा और कुछ नहीं है।
तुम अपना विशेष स्थान बना सकते हो अगर वर्षों तक कड़ी मेहनत करो तो।
3. दूसरो की परवाह करने से कुछ प्राप्त नहीं होगा - दूसरे की थाली में घी हमेशा ज्यादा दिखता है।
जितने संदेह तुम्हे अपने भविष्य को लेकर है, उतने ही तुम्हारी साथियों को भी है , फिर चाहे उनका फेसबुक स्टेटस चाहे जो भी हो।
Originally written in English by Tim Urban for WaitButWhy


Rohit - more love and power to you and aditi :)